एमसीबी प्रवास के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत द्वारा जगद्गुरु रामभद्राचार्य को ‘जगत गुरु’ न मानने वाले बयान पर राजनीति गरमा गई है। श्रीराम कथा आयोजन समिति और सनातन समाज ने चिरमिरी में जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए महंत को रावण बताया और उनका पुतला फूंका।
चिरमिरी।छत्तीसगढ़ के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत द्वारा जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य पर की गई विवादित टिप्पणी को लेकर एमसीबी जिले के चिरमिरी में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। डॉ. महंत के बयान— “मैं रामभद्राचार्य को जगत गुरु नहीं मानता”— के विरोध में श्रीराम कथा आयोजन समिति और सनातन समाज के लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने विरोध सभा आयोजित कर डॉ. महंत का पुतला दहन किया और उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
क्या है पूरा मामला?
बीते दिनों चिरमिरी में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान एमसीबी प्रवास पर पहुंचे डॉ. चरणदास महंत ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य को लेकर यह टिप्पणी की थी। इस बयान ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। सनातन समाज और कथा आयोजन समिति ने इस बयान को धार्मिक भावनाओं का खुला अपमान करार दिया है।
हल्दीबाड़ी में हुआ उग्र प्रदर्शन
कथा समाप्ति के बाद विरोध दर्ज कराने के लिए चिरमिरी के हल्दीबाड़ी स्थित पंजाब नेशनल बैंक के सामने श्रीराम कथा आयोजन समिति द्वारा एक बड़ी विरोध सभा का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में सनातन धर्मावलंबी, महिला सदस्य और आयोजन समिति के पदाधिकारी शामिल हुए।
गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने “महंत मुर्दाबाद” के नारे लगाए। हाथों में तख्तियां लिए लोगों का आक्रोश चरम पर था; कई तख्तियों पर डॉ. महंत की तस्वीर के साथ “रावण” लिखकर विरोध जताया गया।
सार्वजनिक माफी की मांग
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य केवल एक संत नहीं, बल्कि करोड़ों सनातनियों की अटूट आस्था के प्रतीक हैं। उनके खिलाफ इस तरह की अमर्यादित टिप्पणी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वक्ताओं ने एक सुर में डॉ. महंत से इस बयान के लिए सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है। विरोध सभा के अंत में आयोजन समिति के सदस्यों ने नेता प्रतिपक्ष का पुतला दहन कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
सियासी मायने और आयोजकों का स्पष्टीकरण
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक चश्मे से भी देखा जा रहा है, लेकिन आयोजन समिति ने साफ किया है कि इस विरोध का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। उनका मुख्य उद्देश्य केवल जगद्गुरु रामभद्राचार्य के सम्मान और सनातन आस्था की रक्षा करना है।
