बारिश में भीगते बच्चों को देख पसीजा शिक्षक का दिल, अपने खर्च से 65 विद्यार्थियों को भेंट किए छाते

बारिश में भीगते बच्चों को देख पसीजा शिक्षक का दिल, अपने खर्च से 65 विद्यार्थियों को भेंट किए छाते

मनेन्द्रगढ़। शिक्षक केवल किताबों का ज्ञान ही नहीं देता, बल्कि अपने व्यवहार और संवेदनशीलता से भी जीवन के बड़े पाठ पढ़ाता है। खड़गवां विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला मेरो के प्रधान पाठक प्रीतम सिंह ने ऐसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया है। विद्यालय आते-जाते समय बारिश में भीगते छोटे-छोटे बच्चों को देखकर उनका मन द्रवित हो उठा। नन्हे कदमों को बारिश से बचाने के लिए उन्होंने किसी सहायता की प्रतीक्षा नहीं की, बल्कि अपने स्वयं के खर्च से लगभग 65 छात्र-छात्राओं के लिए छाते खरीदकर उन्हें भेंट कर दिए।

जब बच्चों के हाथों में नए छाते पहुंचे तो उनके चेहरों पर खिली मुस्कान ने पूरे विद्यालय परिसर को खुशी से भर दिया। यह केवल छातों का वितरण नहीं था, बल्कि एक शिक्षक का अपने विद्यार्थियों के प्रति स्नेह, जिम्मेदारी और आत्मीयता का जीवंत उदाहरण था।

इस अवसर पर सेवानिवृत्त परमेश्वर सिंह (संभागीय अध्यक्ष), शरण सिंह (जिला अध्यक्ष, आदिवासी समाज), अमोल सिंह मरावी (पूर्व सरपंच), सुरजीत सिंह (अध्यक्ष, गोंड़ महासभा), ग्राम पंचायत मेरो के सरपंच युधिष्ठिर सिंह सहित हाई स्कूल, मिडिल स्कूल एवं प्राथमिक शाला के शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। सभी ने प्रधान पाठक प्रीतम सिंह की इस मानवीय पहल की मुक्त कंठ से सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण भी किया गया और विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

उपस्थित अतिथियों ने कहा कि समाज में ऐसे शिक्षक ही शिक्षा को वास्तविक अर्थ देते हैं, जो बच्चों की जरूरतों को अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। प्रधान पाठक प्रीतम सिंह की यह पहल साबित करती है कि एक संवेदनशील शिक्षक केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि अपने विद्यार्थियों के जीवन की हर छोटी-बड़ी चिंता को अपना कर्तव्य मानता है। उनकी यह पहल निश्चित रूप से अन्य लोगों को भी समाज सेवा के लिए प्रेरित करेगी।

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