राष्ट्रीय लोक अदालत में न्याय का ऐतिहासिक रिकॉर्ड एक ही दिन में 18,548 प्रकरणों का समाधान, 75 लाख से अधिक राशि का सेटलमेंट

राष्ट्रीय लोक अदालत में न्याय का ऐतिहासिक रिकॉर्ड एक ही दिन में 18,548 प्रकरणों का समाधान, 75 लाख से अधिक राशि का सेटलमेंट

राष्ट्रीय लोक अदालत में न्याय का ऐतिहासिक रिकॉर्ड एक ही दिन में 18,548 प्रकरणों का समाधान, 75 लाख से अधिक राशि का सेटलमेंट

मनेन्द्रगढ़.राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार शनिवार को जिला कोरिया एवं एमसीबी में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने त्वरित, सुलभ और जनोन्मुख न्याय की मिसाल पेश करते हुए रिकॉर्ड स्तर पर प्रकरणों का निराकरण किया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश योगेश पात्रे के मार्गदर्शन में आयोजित इस विशेष न्यायिक अभियान में हजारों नागरिकों को लंबित मामलों से राहत मिली।
लोक अदालत के सफल संचालन के लिए दोनों जिलों में कुल 14 न्यायालयीन खंडपीठों का गठन किया गया, जहां न्यायालयों में लंबित मामलों के साथ-साथ प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का भी बड़े पैमाने पर निराकरण किया गया।

न्यायालयीन मामलों में शानदार सफलता
बैकुंठपुर एवं मनेन्द्रगढ़ में कुल 3577 न्यायालयीन प्रकरण आपसी राजीनामा के लिए रखे गए थे, जिनमें से 3159 मामलों का सफलतापूर्वक समझौते के आधार पर समाधान किया गया। इन मामलों में लगभग 52 लाख 77 हजार 410 रुपये की राशि का सेटलमेंट हुआ।

प्री-लिटिगेशन मामलों में भी बड़ा समाधान
बैंक, नगरपालिका, दूरसंचार, राजस्व एवं अन्य विभागों से जुड़े कुल 18,379 प्री-लिटिगेशन प्रकरण राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 15,389 मामलों का निराकरण किया गया।

कुल आंकड़े बने ऐतिहासिक
दोनों जिलों में मिलाकर कुल 21,956 प्रकरण लोक अदालत में रखे गए, जिनमें से 18,548 मामलों का सफल समाधान किया गया। इस दौरान कुल 75 लाख 03 हजार 821 रुपये की राशि का सेटलमेंट कराया गया, जो इस आयोजन की प्रभावशीलता और जनविश्वास को दर्शाता है।

राजस्व न्यायालयों में भी विशेष पहल
राष्ट्रीय लोक अदालत के अंतर्गत राजस्व न्यायालय, कलेक्टर, एसडीएम एवं तहसीलदार स्तर पर भी विशेष खंडपीठों का गठन किया गया। बैकुंठपुर में 9 तथा एमसीबी जिले में 20 खंडपीठों के माध्यम से आम नागरिकों को शीघ्र न्याय उपलब्ध कराया गया।

न्याय के साथ सामाजिक समरसता को बढ़ावा
राष्ट्रीय लोक अदालत ने केवल प्रकरणों के निपटारे तक सीमित न रहकर आपसी समझौते, सामाजिक सौहार्द और न्याय तक आसान पहुंच की भावना को भी मजबूत किया। वर्षों से लंबित विवादों के समाधान से बड़ी संख्या में नागरिकों को राहत मिली और न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ। यह आयोजन एक बार फिर साबित करता है कि लोक अदालत न्याय व्यवस्था को सरल, त्वरित और जन सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

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