सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज अपने सूरजपुर जिले के दौरे पर रहे, जहां उन्होंने अंचलवासियों को करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की बड़ी सौगात दी। रामपुर गांव में आयोजित ‘सुशासन तिहार समाधान शिविर’ में शिरकत करते हुए मुख्यमंत्री ने 66 करोड़ 99 लाख रुपये की लागत वाले कुल 87 विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इससे पूर्व हेलीपैड पर पहुंचने पर प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका आत्मीय स्वागत किया।
मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर पूरे जिले में भारी उत्साह का माहौल रहा और बड़ी संख्या में ग्रामीण अपने मुखिया की एक झलक पाने के लिए उमड़ पड़े।
प्रोटोकॉल से इतर दिखा मुख्यमंत्री का जमीनी अंदाज
इस दौरे के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बेहद सहज और सादगी भरा रूप देखने को मिला। वीआईपी तामझाम से दूर, मुख्यमंत्री गांव में तेंदू और महुआ के पेड़ के नीचे ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठ गए। उन्होंने एक आम ग्रामीण की तरह लोगों से सीधा संवाद किया और गांव में पेयजल, स्वास्थ्य तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं की जमीनी हकीकत जानी। मुख्यमंत्री का यह ठेठ और सरल व्यवहार पूरे कार्यक्रम के दौरान चर्चा का मुख्य विषय बना रहा।

सुशासन तिहार: अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं की पहुंच
रामपुर गांव में आयोजित इस विशेष ‘समाधान शिविर’ का मुख्य उद्देश्य जनता की समस्याओं का मौके पर ही निपटारा करना था। कार्यक्रम के प्रमुख बिंदु इस प्रकार रहे:
- विकास को नई गति: मुख्यमंत्री द्वारा उद्घाटित और शिलान्यास किए गए 87 कार्यों में सड़क, भवन, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी अहम परियोजनाएं शामिल हैं।
- त्वरित समाधान: शिविर स्थल पर विभिन्न सरकारी विभागों ने स्टॉल लगाए थे, जहां ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ उनके आवेदन स्वीकार किए गए।
- अधिकारियों को निर्देश: आम जनता से सीधे संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों की शिकायतें सुनीं और संबंधित अधिकारियों को उनके त्वरित निराकरण के कड़े निर्देश दिए।
- श्रमिकों को सम्मान: राज्य सरकार की योजना के तहत मुख्यमंत्री ने मंच से पांच तेंदूपत्ता संग्राहकों को ‘चरण पादुका’ (जूते-चप्पल) का वितरण किया, ताकि वन क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को राहत मिल सके।

प्रशासन द्वारा इस वृहद कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। सुशासन तिहार के इस आयोजन से सरकार ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि वह अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
