SECL में पेयजल संकट गहराया, अख्तर जावेद उस्मानी ने बुनियादी सुविधाओं की समीक्षा की मांग की

SECL में पेयजल संकट गहराया, अख्तर जावेद उस्मानी ने बुनियादी सुविधाओं की समीक्षा की मांग की


मनेन्द्रगढ़। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के विभिन्न कोयला क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की अनियमित आपूर्ति को लेकर श्रमिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कई श्रमिक कॉलोनियों में तीन से चार दिन तक पानी नहीं पहुंचने से कर्मचारियों और उनके परिवारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हिंद खदान मजदूर फेडरेशन के सहायक महासचिव अख्तर जावेद उस्मानी ने इस मामले को गंभीरता से उठाते हुए SECL के निदेशक मानव संसाधन को पत्र लिखकर पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की तत्काल समीक्षा और सुधार की मांग की है।


अख्तर जावेद उस्मानी ने कहा कि SECL के कई क्षेत्रों में फिल्टर प्लांट वर्षों पुराने हो चुके हैं। इनके जीर्णोद्धार के साथ आधुनिक तकनीक अपनाने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि एलम, ब्लीचिंग पाउडर, क्लोरीन और लाइम जैसे आवश्यक रसायनों की समय पर खरीदी नहीं हो रही है। प्रेशर फिल्टर का मीडिया भी समय पर नहीं बदला जा रहा। ठेकेदारी के माध्यम से जल वितरण कराया जा रहा है, लेकिन प्रभावी मॉनिटरिंग के अभाव में नियमित एवं पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित नहीं हो पा रही है।


उन्होंने बताया कि हसदेव क्षेत्र में वर्ष 1988 में निर्मित एकीकृत जल प्रदाय योजना के जीर्णोद्धार की स्कीम सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट द्वारा तैयार की जा चुकी है। इस स्कीम के लिए SECL करीब पांच वर्ष पहले 17 लाख रुपये का भुगतान भी कर चुका है, लेकिन विशेषज्ञों द्वारा तैयार योजना अब तक मुख्यालय की स्वीकृति और फंड के इंतजार में लंबित है। बैकुंठपुर क्षेत्र में भी फिल्टर प्लांट की योजना लंबित बताई गई है।


चिरमिरी क्षेत्र में पेयजल के स्रोत के साथ-साथ फिल्ट्रेशन और वितरण व्यवस्था भी चुनौती बनी हुई है। उस्मानी ने कहा कि पानी सप्लाई के लिए पर्याप्त स्पेयर पंप और स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध नहीं हैं। वहीं खदानों का पानी बिना समुचित फिल्ट्रेशन के सार्वजनिक जल प्रवाह में छोड़े जाने से पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। राजनगर आरओ, पैराडहार और कुर्जा कॉलोनी के खराब हो चुके प्रेशर फिल्टरों के स्थान पर एकीकृत फिल्टर प्लांट बनाने की आवश्यकता बताई गई है।

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अख्तर जावेद उस्मानी ने SECL की बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कॉलोनियों की सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं, सफाई व्यवस्था नियमित नहीं है और सिविल विभाग का करोड़ों रुपये का फंड तक खर्च नहीं हो पाया। स्कूल बसों का संचालन बंद है, सीलिंग फैन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे तथा कई श्रमिकों को लंबे समय से गमबूट और सेफ्टी शू नहीं मिले हैं। एलपीजी गैस सिलेंडर की राशि का पूरा भुगतान नहीं होने, कॉलोनी डिस्पेंसरी में डॉक्टरों की कमी और जर्जर आवासों में रहने को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई।


उन्होंने कहा कि एक ओर उत्पादन लक्ष्य लगातार बढ़ाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं में लगातार कटौती हो रही है। पानी, बिजली, आवास, सड़क और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं के लिए कर्मचारियों से कटौती किए जाने के बावजूद उन्हें पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलना गंभीर स्थिति है।


उस्मानी ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो श्रमिकों का बढ़ता असंतोष आंदोलन का रूप ले सकता है। उन्होंने SECL प्रबंधन से स्वच्छ पेयजल की नियमित आपूर्ति, फिल्टर प्लांटों के जीर्णोद्धार, मकानों की मरम्मत, टूटी छतों और जल रिसाव की समस्या, स्कूल बस, सड़क, बिजली, सफाई तथा स्वास्थ्य सुविधाओं का तत्काल समाधान करने की मांग की है।

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