अहिंसा ही मानव का सर्वोच्च धर्म :उत्तम दुग्गड,श्री जैन श्वेताम्बर संघ मनेन्द्रगढ़ द्वारा भगवान महावीर स्वामी जयंती धूमधाम से मनाई गई, अहिंसा के संदेश से गूंजा शहर

मनेंद्रगढ़:- अहिंसा ही मानव का सर्वोच्च धर्म :उत्तम दुग्गड,श्री जैन श्वेताम्बर संघ मनेन्द्रगढ़ द्वारा भगवान महावीर स्वामी जयंतीधूमधाम से मनाई गई, अहिंसा के संदेश से गूंजा शहर , जैन श्वेताम्बर संघ मनेन्द्रगढ़ द्वारा भगवान महावीर स्वामी की जयंती बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस पावन अवसर पर विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पूरा नगर भगवान महावीर के अहिंसा, सत्य और करुणा के संदेश से गूंज उठा।


कार्यक्रम की शुरुआत मंगलवार प्रातः गुरु नानक चौक से भव्य शोभायात्रा के साथ हुई। यह शोभायात्रा भगत सिंह चौक, गांधी चौक, झारखंड रोड होते हुए ओसवाल भवन पहुंचकर संपन्न हुई। शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालु अहिंसा और शांति के संदेश से जुड़े नारे लगाते हुए चल रहे थे। पुरुष, महिलाएं और बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर आयोजन की शोभा बढ़ा रहे थे।


शोभायात्रा के पश्चात ओसवाल भवन में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसमें प्रमिला कातेला, उमा सोनावत, रिंकू बोथरा सहित अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण योगदान देते हुए भक्ति और संस्कार से ओत-प्रोत प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रमों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।


सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के उपरांत उद्बोधन का क्रम प्रारंभ हुआ। श्री जैन श्वेताम्बर संघ के अध्यक्ष उत्तम दुग्गड ने अपने संबोधन में भगवान महावीर स्वामी के सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अहिंसा ही मानव जीवन का सर्वोच्च धर्म है। उन्होंने कहा कि आज के समय में महावीर स्वामी के विचारों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है, जिससे समाज में शांति और सद्भाव कायम रह सके।


वहीं सुंदरलाल दुग्गड़ ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भगवान महावीर ने सत्य, अहिंसा और अपरिग्रह का जो संदेश दिया है, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि वे अपने जीवन में इन मूल्यों को अपनाकर एक आदर्श समाज का निर्माण करें।


पंकज जैन संचेती ने कहा कि महावीर स्वामी का जीवन हमें त्याग, संयम और आत्मानुशासन की प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं को विशेष रूप से इन आदर्शों को अपनाने की सलाह दी, ताकि वे एक सशक्त और नैतिक समाज का निर्माण कर सकें।


इसी क्रम में ललिता संचेती ने अपने भावपूर्ण उद्बोधन में कहा कि व्यशन मुक्त समाज निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि घर-परिवार में संस्कारों की नींव मजबूत होगी, तो समाज स्वतः ही व्यशन मुक्त सशक्त और अनुशासित बनेगा।


इस अवसर पर संघ के सचिव विमल छाजेड़, आनंद बोथरा, डालचंद कतेला, जितेंद्र चोपड़ा, राजेश कुम्भट, मुकेश जैन, राजेंद्र बोथरा, रौनक बोथरा सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ, जहां सभी ने भगवान महावीर के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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