भक्ति, सेवा और समर्पण का संगम: हनुमान जन्मोत्सव पर ‘भंडारागढ़’ बना मनेन्द्रगढ़

भक्ति, सेवा और समर्पण का संगम: हनुमान जन्मोत्सव पर ‘भंडारागढ़’ बना मनेन्द्रगढ़
मनेन्द्रगढ़। जिला मुख्यालय मनेन्द्रगढ़ में धार्मिक आयोजनों के दौरान लगने वाले अटूट भंडारों की परंपरा ने शहर को एक नई पहचान दी है। यही कारण है कि कई लोग अब इसे प्रेमपूर्वक “भंडारागढ़” कहने लगे हैं, और यह नाम किसी भी प्रकार से अतिशयोक्ति नहीं लगता। चाहे दुर्गा पूजन हो, श्री रामनवमी, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, महाशिवरात्रि या फिर रामदूत श्री हनुमान का जन्मोत्सव—हर अवसर पर पूरे शहर में सेवा और भक्ति की अद्भुत मिसाल देखने को मिलती है


हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर गुरुवार सुबह से ही मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का दौर शुरू हो गया। श्री हनुमान जी के बाल स्वरूप की विधिवत पूजा की गई, जिसके बाद पूरे नगर में भंडारे और शरबत वितरण की मानो होड़ सी मच गई। शहर के विभिन्न हिस्सों—खेड़िया तिराहा, झगराखंड रोड स्थित हनुमान मंदिर, दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर स्टेशन रोड, श्री विजय हनुमान टेकरी, संकट मोचन हनुमान मंदिर (सीएमओ बंगले के सामने), मौहार पारा, चनवारीडांड गौठिया पारा तथा सिद्ध बाबा घाटी हनुमान मंदिर सहित कई स्थानों पर भव्य आयोजन हुए।


इन सभी मंदिरों में भजन-कीर्तन, अखंड रामायण पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद श्रद्धालुओं के लिए भंडारा प्रसाद वितरित किया गया। भक्तों ने पूरे श्रद्धा भाव से प्रसाद ग्रहण किया और सेवा कार्यों में भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। इससे पूर्व झगराखंड रोड स्थित श्री हनुमान मंदिर से एक भव्य शोभायात्रा भी निकाली गई, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए आगे बढ़ रहे थे, वहीं कई स्थानों पर पुष्प वर्षा कर उनका भव्य स्वागत किया गया।


पूरे दिन शहर के विभिन्न मंदिरों के पट खुले रहे और दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। हर ओर भक्ति, उत्साह और सेवा का वातावरण देखने को मिला। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा मनेन्द्रगढ़ हनुमत भक्ति के रस में डूबा हुआ हो। इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि मनेन्द्रगढ़ न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि सेवा और सामाजिक एकता की भी अनूठी मिसाल है।

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