मनेन्द्रगढ़। आज ‘पृथ्वी दिवस’ (Earth Day) के अवसर पर जहां पूरी दुनिया में पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने की मुहिम चल रही है, वहीं मनेन्द्रगढ़ में इसके बिल्कुल विपरीत और चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है। शहर और इसके आसपास के प्रमुख जल स्रोत लगातार प्रदूषण और उपेक्षा का शिकार होकर अपने अस्तित्व की जंग लड़ रहे हैं।
नदियों का अस्तित्व खतरे में
जिला मुख्यालय के पास बहने वाली प्रमुख नदियां अब जीवनदायिनी नहीं रहीं, बल्कि गंदे नालों में तब्दील हो चुकी हैं:
- प्रमुख नदियां: हसदेव (Hasdeo River), विशाल बोरा और हसिया नदियां भारी प्रदूषण की चपेट में हैं और अपनी पहचान खोती जा रही हैं।
- प्रदूषण का कारण: शहर का अधिकांश दूषित पानी और सीवेज बिना किसी शोधन (Treatment) के सीधे इन नदियों में बहाया जा रहा है।
- जल की गुणवत्ता: नदियों के पानी की गुणवत्ता इस हद तक गिर चुकी है कि यह न तो पीने लायक बचा है और न ही कृषि कार्यों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।

कचरा घर बनते तालाब और विलुप्त होते कुएं
नदियों के साथ-साथ जल संरक्षण के पारंपरिक स्रोत भी अतिक्रमण और गंदगी की भेंट चढ़ चुके हैं:
- तालाबों की दुर्दशा: जोड़ा तालाब, सरोवर मार्ग स्थित सरोवर और बदन सिंह मोहल्ला स्थित तालाब आज जल स्रोत कम और ‘कचरा घर’ ज्यादा नजर आते हैं। इन ऐतिहासिक तालाबों में अब सिर्फ प्लास्टिक, घरेलू कचरा और गंदगी का अंबार दिखता है।
- कंक्रीट में दफन होते कुएं: तेजी से बढ़ते अनियोजित शहरीकरण के कारण कई पुराने कुओं को पाटकर उन पर पक्के मकान तान दिए गए हैं। कभी लोगों की प्यास बुझाने वाले इन कुओं के खत्म होने से शहर के भूजल स्तर (Groundwater Level) में भारी गिरावट आ रही है।
कौन है इस संकट का जिम्मेदार?
इस भयावह स्थिति को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इसका जिम्मेदार कौन है? इस संकट के पीछे केवल प्रशासन की लापरवाही ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों की उदासीनता भी बराबर की जिम्मेदार है। बिना योजना के बढ़ता शहरीकरण, जल संरक्षण के प्रति जागरूकता की कमी और लचर कचरा प्रबंधन इस समस्या को और विकराल बना रहे हैं।

विशेषज्ञों की चेतावनी और समाधान
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इन प्राकृतिक धरोहरों को नहीं बचाया गया, तो भविष्य में मनेन्द्रगढ़ को भयंकर जल संकट का सामना करना पड़ेगा। इस स्थिति से निपटने के लिए निम्नलिखित कदम उठाना अनिवार्य है:
- नदियों की तत्काल सफाई और गंदे पानी को रोकने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की व्यवस्था।
- सिकुड़ते और प्रदूषित होते तालाबों का पुनर्जीवन और गहरीकरण।
- जल संरक्षण और उचित कचरा प्रबंधन के प्रति बड़े स्तर पर जन-जागरूकता अभियान।
पृथ्वी दिवस हमें केवल जागरूक होने का संदेश नहीं देता, बल्कि यह चेतावनी भी देता है कि यदि हमने अब भी प्रकृति के साथ संतुलन नहीं बनाया, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। मनेन्द्रगढ़ की वर्तमान स्थिति इसी बड़े खतरे की ओर इशारा कर रही है।
