मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी): छत्तीसगढ़ के नवगठित एमसीबी जिले से एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है। कभी अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए पहचाने जाने वाला यह क्षेत्र अब शिक्षा के मामले में प्रदेश के अन्य जिलों से पिछड़ता जा रहा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 33 जिलों की रैंकिंग में एमसीबी अंतिम पायदान (33वें स्थान) पर पहुंच गया है। इस गिरावट ने न केवल अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
धरातल पर बदहाल व्यवस्था, कागजों में ‘सब चंगा’
जिले के सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत विभागीय दावों से कोसों दूर है। रिपोर्टों के अनुसार, जिले में गिरते स्तर के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- शिक्षकों का अभाव: कई स्कूलों में स्वीकृत पदों के मुकाबले शिक्षकों की भारी कमी है।
- बुनियादी सुविधाओं की किल्लत: स्कूलों में बैठने की व्यवस्था और बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बच्चों की पढ़ाई में बाधा बन रहा है।
- कौशल का अभाव: सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कई छात्र अपनी कक्षा के स्तर के अनुसार बुनियादी पढ़ना-लिखना भी नहीं जानते।
निरीक्षण या महज औपचारिकता?
स्थानीय लोगों और जानकारों का आरोप है कि विभाग द्वारा किया जाने वाला ‘निरीक्षण’ अब केवल एक औपचारिकता बनकर रह गया है। जिम्मेदार अधिकारी एयरकंडीशंड कमरों से बाहर निकलकर स्कूलों की वास्तविक स्थिति देखने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। जब सिस्टम में जवाबदेही की कमी होती है, तो उसका सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ता है।
“शिक्षा पर करोड़ों खर्च करने के बाद भी अगर जिला प्रदेश में सबसे पीछे है, तो यह सिस्टम की विफलता है। अब सुधार के लिए ठोस कदम उठाने का समय आ गया है।”
सुधार की दरकार
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते शिक्षा विभाग ने जमीनी हकीकत को स्वीकार नहीं किया और पारदर्शी सुधार लागू नहीं किए, तो जिले की आने वाली पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय हो सकता है। अब देखना यह होगा कि इस शर्मनाक रैंकिंग के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग क्या कड़े कदम उठाता है।
