नारायणपुर। बस्तर की कठिन परिस्थितियों, नक्सलवाद और विकास की चुनौतियों को बचपन से देखने-समझने वाली बेटी आज नारायणपुर जैसे संवेदनशील जिले की कमान संभाल रही है। नारायणपुर की कलेक्टर नम्रता जैन को लेकर लोगों में नई उम्मीद और विश्वास का माहौल दिखाई दे रहा है।
दंतेवाड़ा जिले के गीदम में जन्मी और बस्तर अंचल में पली-बढ़ी नम्रता जैन ने उन हालातों को करीब से देखा है, जहां नक्सलवाद केवल सुरक्षा का विषय नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन का हिस्सा रहा है। यही वजह है कि नारायणपुर जैसे चुनौतीपूर्ण जिले में उनकी नियुक्ति को केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि जमीनी समझ रखने वाली अधिकारी को बड़ी जिम्मेदारी सौंपे जाने के रूप में देखा जा रहा है।
स्थानीय परिस्थितियों की समझ बनेगी सबसे बड़ी ताकत
नारायणपुर लंबे समय से नक्सल प्रभावित और संवेदनशील जिलों में शामिल रहा है। अबूझमाड़ जैसे दूरस्थ इलाकों तक शासन की योजनाओं को पहुंचाना आज भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। ऐसे में बस्तर की सामाजिक परिस्थितियों, आदिवासी जीवन और क्षेत्रीय समस्याओं को समझने वाली अधिकारी से विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

अबूझमाड़ तक विकास पहुंचाने की चुनौती
जिले के कई गांव वर्षों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सुविधाओं से दूर रहे हैं। शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। माना जा रहा है कि क्षेत्रीय अनुभव रखने वाली अधिकारी दूरस्थ इलाकों की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझते हुए योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू कर सकती हैं।
IPS से IAS तक तय किया प्रेरणादायक सफर
नम्रता जैन ने पहले UPSC परीक्षा में AIR 99 हासिल कर IPS सेवा प्राप्त की थी। बाद में उन्होंने UPSC 2018 में AIR 12 हासिल कर IAS सेवा में चयन पाया। वे 2019 बैच की IAS अधिकारी हैं। इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि और प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्हें मेहनती और जमीनी अधिकारी माना जाता है। वर्तमान में वे नारायणपुर की कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।

सिर्फ प्रशासन नहीं, विश्वास कायम करने की भी जिम्मेदारी
नारायणपुर जैसे जिले में कलेक्टर की भूमिका केवल सरकारी कामकाज तक सीमित नहीं होती। यहां हर निर्णय का असर दूरस्थ गांवों, आदिवासी समुदायों, युवाओं, शिक्षा व्यवस्था और विकास कार्यों पर पड़ता है। ऐसे में लोगों की अपेक्षाएं भी स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती हैं।
संघर्षों को देखने वाली बेटी अब बदलाव की उम्मीद
जिस बस्तर ने एक बच्ची को संघर्षों के बीच बड़ा होते देखा, आज वही बस्तर उस बेटी को नारायणपुर जैसे चुनौतीपूर्ण जिले की जिम्मेदारी निभाते देख रहा है। यह केवल एक अधिकारी की कहानी नहीं, बल्कि उस विश्वास की कहानी भी है कि जो व्यक्ति चुनौतियों को महसूस करके बड़ा हुआ हो, वह बदलाव की जरूरत को सबसे बेहतर तरीके से समझ सकता है।
