जगद्गुरु रामभद्राचार्य का पलटवार: बोले– "मेरे जगद्गुरु होने पर शक है, तो खुले मंच पर ले लें परीक्षा"
चिरमिरी। लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में चल रही श्रीराम कथा के नौवें दिन जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने प्रतिपक्ष के नेता चरणदास महंत के बयान पर तीखा पलटवार किया है। कथा व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि यदि किसी को उनके जगद्गुरु होने पर कोई संदेह या सवाल है, तो वह खुले मंच पर आकर उनका परीक्षण (परीक्षा) कर सकता है।
शास्त्रों की कसौटी पर खरा उतरा हूँ: स्वामी रामभद्राचार्य
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने जगद्गुरु पद की गरिमा और उसकी चयन प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए कहा कि इस पद तक पहुँचने के लिए शास्त्रों में बेहद कड़े नियम और कसौटियाँ निर्धारित हैं।
अनिवार्य भाष्य: जगद्गुरु बनने के लिए तीन प्रमुख ग्रंथों पर भाष्य (व्याख्या) लिखना अनिवार्य होता है।
अखाड़ों की मान्यता: इन भाष्यों को सभी अखाड़ों द्वारा सर्वसम्मति से मान्यता दी जानी जरूरी है।
22 भाषाओं का ज्ञान: उन्होंने बताया कि वे इन सभी कसौटियों पर पूरी तरह खरे उतरे हैं और 22 भाषाओं में धाराप्रवाह बोल सकते हैं।
“जो राम जी से प्रेम करेगा, उसे मेरा आशीर्वाद मिलेगा।” — जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य
रामजन्मभूमि आंदोलन और राजनीति पर साधा निशाना
अपने संबोधन में उन्होंने रामजन्मभूमि आंदोलन के संघर्षपूर्ण दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान वे खुद जेल गए थे। उस दौर में रामभक्तों पर हुए लाठीचार्ज और गोलीकांड को देश आज भी नहीं भूला है। उन्होंने वर्तमान में विरोध करने वाले राजनेताओं पर सवाल उठाते हुए पूछा कि रामजन्मभूमि आंदोलन में आखिर उनका क्या योगदान था?
संत समाज के प्रति की जा रही असम्मानजनक टिप्पणियों पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “जोगी थोड़े अच्छे थे, लेकिन उसके बाद की स्थिति क्या है, यह सब देख रहे हैं।”
‘जय श्रीराम’ के नारों से गूंजा पंडाल
जगद्गुरु के इस आक्रामक और बेबाक संबोधन के दौरान पूरा कथा स्थल ‘जय श्रीराम’ के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। इस अवसर पर लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम के पंडाल में भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे, जिन्होंने तालियों और जयकारों के साथ जगद्गुरु की बातों का समर्थन किया।